पोषण सरकार: सुपोषित मध्यप्रदेश की ओर

पोषण सरकार: सुपोषित मध्यप्रदेश की ओर

आपने कई तरह की सरकारों के बारे में सुना होगा जैसे केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, पंचायती राज सरकार,ग्राम सरकार, बड़ी सरकार, छोटी सरकार, पारदर्शी सरकार, अब भला यह पोषण सरकार क्या है। यह शब्द आपको जरूर थोड़ा आश्चर्य में डाल रहा होगा, लेकिन इसके पीछे की बड़ी सोच से आपको तसल्ली होगी। देश भर में मनाए जा रहे पोषण माह के अंतर्गत महिला एवं बाल विकास विभाग मध्यप्रदेश ने पोषण सरकार की संकल्पना से कुपोषण और स्वास्थ्य के प्रति प्रतिबदधता का नया अध्याय लिखना शुरू किया है। इस संकल्पना में शीर्ष से लेकर समुदाय स्तर तक की भागीदारी सुनिश्चित करके वास्तव में पोषण के लिए लोकतंत्र की एक अनूठी कोशिश की गई है, इसके अपेक्षित परिणाम एक तंदुरुस्त मप्र का निर्माण करेंगे।
मध्यप्रदेश में पोषण के मानक अपेक्षा के अनुसार नहीं है। केवल मध्यप्रदेश में ही नहीं देश के नजरिए से भी अभी चुनौतियां बरकरार हैं, बहुत काम किया जाना बाकी है। खासकर महिलाओं, बच्चों और किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य और पोषण मानकों की बात करेंगे तो स्थिति काफी गंभीर नजर आती हैं।
इसे दूर करने के लिए सरकार ने कई स्तरों पर कोशिश की है। जागरुकता अभियानों के जरिए पोषण शिक्षा के लिए लगातार काम हुआ है, वहीं कमजोर वर्गों के लिए कई योजनाओं के माध्यम से पोषण आहार देने का काम भी हुआ है। 45 साल से महिला एवं बाल विकास विभाग आंगनवाड़ियों के माध्यम से इस दिशा में काम कर रहा है। समय और परिस्थितियों के अनुसार इन योजनाओं को सुदृढ़ बनाया गया है। मध्याहन भोजन और सार्वजनिक वितरण प्रणाली से भी बच्चों और कमजोर वर्ग के परिवारों की पोषण जरुरतों को पूरा करने का प्रयास किया गया है। पर इनमें समाज या समुदाय की भागीदारी को कभी इतनी तवज्जो नहीं गई है, जबकि वास्तव में कोई भी योजना या विकास का मॉडल तभी टिकाउ हो सकता है, जबकि उसमें समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इसी बात को रेखांकित करती है पोषण सरकार। यानी पोषण के लिए लोगों के द्वारा, लोगों की निगरानी में चलने वाली सरकार।

इस नीति का मकसद है कि सामुदायिक स्तर पर पोषण सरकार को मजबूती दी जाए। इसमें सामुदायिक जिम्मेदारी और स्वामित्व की भावना का विकास किया जाए। समुदाय को यह आभास कराया जाए कि उनकी सामाजिक पूंजी क्या है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का पता लगाया जाए और उन संसाधनों को उपयुक्त वातावरण बनाकर लोगों तक पहुंचाया जाए। सामुदायिक पर्यवेक्षण व सोशल ऑडिट के जरिए मिलने वाले लाभों की पहुंच सुनिश्चित की जाए। स्थानीय व पंचायती राज संस्थाओं और सतर्कता समितियों को मज़बूत बनाया जाए। बच्चों, महिलाओं और समुदाय से सम्बंधित पोषण व स्वास्थ्य समस्याओं को उठाने में उनकी सहभागिता सुनिश्चित की जाए। ऐसा करके यह शीर्ष से लेकर जमीन तक एक बेहतर मॉडल के रूप में नजर आती है।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पोषण माह में आयोजित एक कार्यक्रम में पोषण प्रबंधन रणनीति को जारी किया। उनका मानना है कि कुपोषण मुक्ति की लड़ाई में समाज का साथ मिलना जरूरी है। इसके लिये हर गांव में अन्नपूर्णा पंचायत बनाई जाएगी। जिसमें पंचायत, नगरीय निकाय, स्व-सहायता समूह, स्कूल प्रबंधन समिति, वन प्रबंधन समिति सहित अन्य लोगों को जोड़ा जाएगा। पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर निगरानी रखना इस पंचायत का काम होगा। ग्राम पंचायत रुप से काम करने वाले शौर्य दल, युवाओं, किशोरों व महिलाओं के समूहों, स्व-सहायता समूहों व समुदाय में प्रभाव रखने वाले व्यक्तियों को भी जोड़ा जाएगा। पोषण सरकार समग्र दृष्टिकोण से काम करेगी। जैसे किसी गांव की कृषि या खादय विविधता कैसे मजबूत हो सकती है, लोगों तक साफ पेयजल कैसे पहुंच सकता है, साफ—सफाई का व्यवहार समुदाय के स्तर पर कैसे मजबूत हो सकता है, इन सभी कारकों का समावेश किया जाएगा।
अन्नूपूर्णा पंचायत मतलब सामुदायिक स्तर पर विविध प्रकार के खादय पदार्थ जमा करके उन्हें जरुरतमंदों तक पहुंचाकर पोषण मजबूत बनाया जाएगा। वहीं सामुदायिक रसोईघरों के माध्यम से हर शनिवार साप्ताहिक बाल भोज आयोजित करके बच्चों को स्थानीय स्तर पर बनाए जाने वाले व्यंजनों को आंगनवाड़ियों में प्रदर्शित किया जाएगा। वहीं पोषण वाटिकाओं को भी इसके तहत तैयार किया जाएगा।
कुल मिलाकर यह पूरे देश में एक अनूठा प्रयोग शुरू होने जा रहा है। उम्मीद की जा सकती है कि इस समग्र दृष्टिकोण से मध्यप्रदेश पोषण की चुनौतियों को दूर कर पाएगा।

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