स्तनपान नहीं कराने से अर्थव्यवस्था को भी होता है नुकसान

महिला एवं बाल विकास विभाग, मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश शासन

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समेकित बाल विकास परियोजना

स्तनपान नहीं कराने से अर्थव्यवस्था को भी होता है नुकसान

स्तनपान नहीं कराने से केवल शिशु को नुकसान नहीं होता, देश की अर्थव्यवस्था को भी करोड़ों का नुकसान होता है। यह सुनकर आपको वाकई आश्चर्य हो रहा होगा कि भला स्तनपान का देश की अर्थव्यवस्था से क्या संबंध हो सकता है। लेकिन 1 से 7 अगस्त तक पूरी दुनिया में मनाए जा रहे विश्व स्तनपान सप्ताह में यह बात जानना बेहद जरूरी है कि अकेले भारत में यह नुकसान तकरीबन 9 हजार करोड़ रुपए का है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनीसेफ की ओर से ग्लोबल ब्रीस्ट फीडिंग स्कोरकार्ड इस संबंध में पूरी दुनिया के आंकड़े प्रस्तुत करता है। वर्ष 2019 की रिपोर्ट में बताया गया था कि बच्चों को अपनी मां का दूध नहीं मिलने के कारण भारत की अर्थव्यवस्था को 9000 करोड़ रूपए का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया था।

ऐसा इसलिए क्योंकि जब बच्चों को स्तनपान नहीं मिलता है तो लगभग 1 लाख बच्चों की इससे जुड़े कारणों से मौत हो जाती है। चिकित्सा विज्ञान कहता है कि पहले घंटे में मां का दूध बच्चे के लिए सबसे उत्तम आहार है, और सामाजिक व्यवहार शिशु को शहद चटाने पर आमादा होता है।

विज्ञान कहता है कि पहले छह महीने में शिशु को केवल मां के दूध के अलावा कोई भी आहार की जरूरत नहीं, पानी भी नहीं। पर व्यवहार बच्चे को घुट्टी चटा—चटा कर सेहत बनाए रखने की बजाय बीमार बना देता है। छह माह के बाद भी जैसा आहार शिशु को चाहिए, वैसा बनाए रखने की या तो अज्ञानता है, या लापरवाही है, या फिर अनुपलब्धता है। यही कारण है कि शिशुओं का स्वास्थ्य भारत में तमाम कोशिशों के बावजूद सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।

वास्तव में मां का दूध मानव प्रजाति को कुदरत का आशीर्वाद है। इस आशीष से किसी भी बच्चे को वंचित करना न्यायसंगत नहीं है। हमें कुदरत की इस बात को समझना चाहिए और यह भी समझना चाहिए कि इससे केवल शिशु को नहीं, देश की अर्थव्यवस्था को भी नुकसान है।

आईये इस विश्व स्तनपान सप्ताह में हम एक स्वस्थ दुनिया के लिए स्तनपान का समर्थन करें।

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