एक स्वस्थ दुनिया के लिए शिशु स्तनपान का समर्थन कीजिए

महिला एवं बाल विकास विभाग, मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश शासन

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समेकित बाल विकास परियोजना

एक स्वस्थ दुनिया के लिए शिशु स्तनपान का समर्थन कीजिए

एक स्वस्थ्य दुनिया के लिए स्तनपान का समर्थन, यही थीम है इस साल विश्व स्तनपान सप्ताह की। स्तनपान सप्ताह यानी साल के वह सात दिन जिनमें हम मां और शिशु के एक प्यार भरे रिश्ते को हर तरह से मजबूत बनाने की अपनी इच्छाशक्ति दिखाते हैं। 1 से 7 अगस्त तक पूरी दुनिया में विभिन्न तरह के आयोजन होते हैं। अब जबकि दुनिया कोविड 19 के संकट से गुजर रही है तो इस साल की थीम यानी एक स्वस्थ दुनिया के लिए स्तनपान का समर्थन बहुत ज्यादा प्रासंगिक हो गई है।

इसे थोड़ा गहराई से समझने की जरूरत है। इस संकट से दुनिया को बचाए रखने में किसी का योगदान है तो वह है इम्युनिटी पावर। इंसान की रोगों से लड़ने की यह क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि जन्म से किस तरह की देखरेख हुई है, उसे पहले घंटे में मां का गाढ़ा दूध मिला है या नहीं, उसने जन्म से छह माह तक एक्स्क्लूसिव फीडिंग यानी केवल स्तनपान किया है या उसे कुछ और भी दिया जाते रहा है।

स्तनपान केवल कोविड जैसी बीमारियों में ही प्रासंगिक नहीं बना है, इसने शिशु और बाल मृत्यु दर के गंभीर आंकड़ों को भी सुधारा है। अब समाज में इसके लिए चेतना आ रही है। इसमें केवल महिलाओं की ही भूमिका नहीं है, पुरुषों ने भी इस बात को समझा है। शिशु की देखरेख में अब वह भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं। यही कारण है कि मध्यप्रदेश के कई जिलों में जन्म के पहले घंटे में स्तनपान का आंकड़ा पचास फीसदी से ज्यादा पहुंच गया है, हालांकि मंजिल अभी दूर है, पर सामाजिक चेतना और सभी के मिले—जुले प्रयासों से वह वक्त जल्द ही आएगा। इसके लिए जरूरी नहीं कि यह जिम्मेदारी केवल मां के कांधों पर हो, पुरुषों को भी समझना होगा कि एक स्वस्थ और बेहतर बचपन बनाने की जिम्मेदारी मां और पिता दोनों के कांधों पर है।

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